शिथिलीकरण आसन और उनके लाभ Sithikaran Asan in Hindi

शिथिलीकरण  आसन 

शिथिलीकरण आसनों के महत्वा पर जितना प्रकाश डाला जाये उतना ही कम है आसन सत्र के प्रारम्भ और समापन पर जब कभी शरीर में थकान का अनुभव हो तो इन  असानो का अभ्यास कर लेना चाहिए। 
 
 
 
 
देखा जाय तो यह आसन बड़े ही सरल होते हैं लेकिन इन आसनो को बड़े ही सही ढंग से करना कठिन है, क्योंकि शरीर की सभी मासपेशियों को सचेत होकर सिथिल और तनाव  मुक्त करना होता है प्रायः ऐसा लगता है की मांसपेशियां तनाव मुक्त हो ही गई परन्तु वास्तव में उनमें कड़ापन बना रहता है यहाँ तक की निद्रा अवस्था में भी सिथिकरण के भ्रामक होता है यह अध्याय के आसनो के द्वारा  अध्याय में शिथिलीकरण से मिली हुई ऊर्जा को अपने शरीर के अंदर समाहित करने का प्रयास करेंगे। 
 
उठने बैठने की दोष पूर्ण एवं असमान्य गतिविधियों या गलतियों के कारण पीठ की पेसियों की अधिक दबाओ पड़ता है जिसका निराकरण पारम्परिक ढंग से पीठ के बल  या सीने के बल लेटने से नहीं हो पता है। 
 
अतः पेट के बल किये जाने वाले कुछ विश्राम दायक अभ्यासों से मेरु दंड और उससे सम्बंधित अचनाओं को सुभट शिथिलिता प्राप्त होती है पीठ या मेरु दंड से सम्बंधित समस्याओं से ग्रस्त लोगों के लिए  असानो की अनुसंशा विशेष रूप से की जाती है  में किसी भी समय  सुख दायक अवधी तक किये जा सकते हैं। 
 
इन को शिथिलीकरण के दैनिक क्रियाओं के साथं जोड़ा जा सकता है।  
 
आइये जानते है शिथिलीकरण आसन कैसे करते हैं?
 
 

सवासन Savasan in hindi 

 
पीठ के बल सीधा लेट कर भुजाओं को शरीर से पंद्रह सेंटीमीटर दूर रखें , हथेलियां ऊपर की ओर खुली रहेंगी , आराम के लिए सिर के  नीचे योग मत या कोई पतला कपड़ा मोड़ कर रख सकते हैं।  
 
 

 

 

 

 हाथ की उंगलिया थोड़ी मुड़ी रहे पंजों को थोड़ा आराम दायक स्थिति में एक दूसरे के से थोड़ा अलग कर लें और आँखों को बंद करें सिर और मेरुदंड एक सीध में रहे ध्यान रखें की सिर एक तरफ या दूसरी तरफ न झुके सम्पूर्ण शरीर को सिथिल करें और शरीर की साडी हलचल बंद कर दें स्वाभाविक स्वांस के प्रति  सजग हो जाएँ और उसे लैय पूर्ण एवं सजग होने दें।
 
 
 
 
स्वांसों की उलटी गिनती 27 से आरम्भ करें और सुण्या तक लें आएं मानसिक रूप से दोहराएं मैं  स्वांस ले रहा हूँ यही वाक्य 27 से शून्य  तक दोहराते रहें जिससे मन को कुछ मिनटों तक स्वांस पर टिकाया जा सकता है जिससे शरीर तनाव मुक्त हो जायेगा।
 
  
समय की उपलब्धता के अनुसार सामान्यता  जितना अधिक समय देंगे उतना अच्छा रहेगा परन्तु असानो के  बिच एक से दो मिनट तक सवासन पर्याप्त है,
 

सजकता व् लाभ 

शारीरिक पहले से शरीर को सिथिल करने और फिर स्वांस और गड़ना के ऊपर विशेष ध्यान दें आध्यात्मिक आज्ञा चक्र पर ध्यान रखें यह आसान सरीर के संसथान को तनाव मुक्त करता है, इस  आसन को सोने के पूर्व या  आसन अभ्यास के पूर्व कर सकत हैं। 
 

आद्वासन advasana in  hindi 

आद्वासन करने के लिए पुनः तैयार होंगे, पेट के बल लेट जाएँ हथेलियों को जमीं पर रखते हुए दोनों भुजाओं को सिर  का स्पर्श करते हुए सामने की ओर  फैला दे।  
 

 

 

 

 
ललाट को जमीं पर रखें आद्वासन में बताई गई  विधि से सम्पूर्ण शरीर को सिथिल करें, अदि स्वांस लेने में कठिनाई हो किसी भी प्रकार की घुटन हो तो वच्छ स्थल के निचे कोई कपड़ा या योगा मैट रखें स्वाभाविक और लय पूर्ण  जमीं पर धीरे से दबाते हुए स्वानसन की तरह स्वांसों की संख्या की गिनती करें, रोगों की चिकित्सा के लिए शिथिलीकरण हेतु जितनी देर सम्भव हो इस आसान को करे। 
 

सजकता 

शारीरिक स्वांस सांसों की संख्या और सम्पूर्ण शरीर के साथिलीकरण पर रखे। 
 

लाभ

इस आसन कको करने से स्लिप डिस्क , कड़ी गर्दन या जकड़ी हुई गर्दन ,और जो लोग झुकी हुई अवस्थ में चलते हैं उन लोगो  के लिए यह आसन काफी फायदे मंद हो सकता है।  
 

ज्येष्टिकासन jyestikasana in hindi

Jyestikasana या “सुपीरियर पोज़” एक योग मुद्रा है जिसका उपयोग विश्राम के लिए किया जाता है। ज्येष्टिकासन करना बहुत आसान है और इसे सभी आयु वर्ग के लोग कर सकते हैं। संस्कृत में, ‘ज्येष्ठा’ का अर्थ ‘बड़ा’ या ‘श्रेष्ठ’ है। योगा में कई रिलैक्स पोज हैं जो शरीर को गहरा आराम दे सकते हैं, आपकी सांसों को स्थिर कर सकते हैं और आपके दिमाग को शांत कर सकते हैं। 
 

 

 

 

 
ज्येष्टिकासन (सुपीरियर पोज) कैसे करें?
पैरों को सीधा रखते हुए पेट के बल लेट जाएं। अपने माथे को फर्श पर टिकाएं। यदि आवश्यक हो तो आप अपने माथे को आराम देने के लिए एक लुढ़का तौलिया या कंबल का उपयोग कर सकते हैं। अपनी उंगलियों को इंटरलॉक करें और अपने हाथों को सिर के निचले हिस्से और गर्दन के ऊपरी हिस्से के बीच के क्षेत्र पर कानों के पीछे रखें।कोहनियों को धीरे से फर्श को छूने दें।एक सामान्य और लयबद्ध तरीके से सांस लें और शरीर के सभी हिस्सों को आराम दें। पीठ और कंधों की मांसपेशियां। आराम करें और 2 – 5 मिनट के लिए या जब तक यह आरामदायक हो, तब तक इस स्थिति को बनाए रखें।
 

लाभ 

इस आसान को करने से सर्वाइकल जैसी समस्या से निजात मिलता है, जकड़ी हुई गर्दन व गर्दन में कड़े पैन से निजात मिलती है, शरीर के ऊपरी भाग में किसी भी प्रकार की समस्या से छुटकारा मिलता है। 
 

मकरासन makrasana in hind

पेट के बल सपाट लेट जाएँ कोहनियों को जमीं पर रखते हुए उनके सहारे सर और कंधे को उठयें और ठुड्डी को हथेलियों पर टिका दें, मेरुदंड में अधिक लाभ पहुंचाने के लिए केहुनियों को एक साथ रखें गर्दन पर दबाओ की अधिकता को कम करने के लिए कोहनियों को  थोड़ा अलग कर लें। 
 

 

 

 

 
मकरासन में दो बिंदुओं पर प्रभाव महशुस होता है गर्दन और पीठ का निचला भाग यदि केहुनियों सामने वच्छ से अधिक दूर हो जाये तो गर्दन में तनाव महसूस होता है यदि उन्हें वच्छ स्तल के निकट लाया जाता है तो पीठ के निचले भाग में अधिक तनाव महसूस होता है। 
 
किहनियों की इस स्थिति को इस प्रकार समायोजित कर लें की ें दोनों बिंदुओं पर संतुलित  प्रभाव पड़े आदर्श  स्थिति  है सम्पूर्ण मेरुदंड सामान रूप से तनाव मुक्त हो जाए, सम्पूर्ण शरीर को सिथिल छोड़ दें और आंखे बंद कर लें स्वसन सहज सामान्य लय पूर्ण तरीके से स्वांस लेते छोड़ते रहें, जितना देर संभव हो अपने शारीरिक छमता के अनुसार करें। 
 

सजकता 

 
शारीरिक स्वसन क्रिया अथवा पीठ के निचले भाग पर एकाग्रता के साथ स्वांस की गिनती और सम्पूर्ण शरीर के शिथिलीकरण पर पड़ता है जिन्हे पीठ या मेरुदंड की शिकायतें है वव स्वांस लेते समय अपनी सजकता को मेरुदंड के पुछसस्त से गर्दन तक और स्वांस छोड़ते समय गर्दन से पुछसस्त तक घुमाएं कल्पना करें की मेरुदंड में स्वांस ऊपर निचे उसी प्रकार जा रही है जैसे कांच की नली में स्वांस का आवागमन हो रहा है  इससे  मिली हुए ऊर्जा शरीर के अंदर समाहित होने देंगे। 
 

मत्स्य क्रीड़ासन  matsya kridasan in hindi 

पेट के बल लेट जाएँ उसी प्रकार से बाएं पैर से बगल की ओर मोड़ कर बाएं पैर को पश्लीतों की ओर ले आएं , दाहिने पैर  को सीधा रखें भुजाओं को बाएं ओर घुमाते  और बाएं किहनियों को बाएं घुटने पर टिकाएं यदि सुविधाजनक न हो तो उसे जमीं पर टिकाएं आराम के लिए भुजा पर थोड़ा निचे की और टिकाएं अंतिम स्थिति में विश्राम करें कुछ समय बाद करवट बदल दें यह स्थिति कीड़ारत मछली के सामान है अवधी दोनों करवट में जितनी देर कर सकते है करें , इस आसान से मिली हुई ऊर्जा अपने शरीर के अंदर समाहित होने देंगे। 
 

 

 
 
लाभ 
यह आसान आंतों के खिचाव  द्वारा पाचन क्रमणकुंचन को प्रेरित कब्ज को दूर करने सहायक होता है सायटिका कि परेशानी से आराम दिलाता है पीठ में दर्द के रोगी को आगे के झुक कर किये जाने वाले असानो से बहुत ही लाभदायक होता है। 

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