5 योगासन जिनको करने से आपकी रीढ़ का दर्द तुरंत हो जाएगा गायब (Baba ramdev yoga for spinal card in hindi)

 5 योगासन जिनको करने से आपकी रीढ़ का दर्द तुरंत हो जाएगा गायब  (Baba ramdev yoga for spinal card in hindi)

बाबा रामदेव द्वारा विभिन्न रोगों से छुटकारा पाने के लिए विभिन्न प्रकार के योगासन अनुलोम-विलोम तथा प्रणायाम करने की सलाह दी है। इसके अतिरिक्त आयुर्वेद में भी योग को अधिक महत्व दिया गया है। बाबा रामदेव जी ने कहा है, यदि हम प्रतिदिन योगासन प्रणायाम करते हैं, तो रोगों से मुक्त रहेंगे। इसके अलावा इन्होंने इस बात की पुष्टि है, कि योगासन करने से (spinal card) रीढ़ की हड्डी में होने दर्द को खत्म किया जा सकता है। 

रीढ़ की हड्डी में होने वाले दर्द (back pain) से छुटकारा पाने के लिए बाबा राम देव जी ने कुछ योगासन करने का सुझाव दिया है जो कि निम्न लिखित हैं

  • उष्ट्रासन
  • भुजगासान
  • सलभसन 
  • मर्कटासन
  • पवनमुक्तासन

अब हम जानेगें कि इन आसनों को करने की विधियां क्या हैं तो चलिए विस्तृत रूप में जानते हैं।

उष्ट्रासन

उष्ट्रासन की सबसे पहली विधि है, कि आप अपने पैरों के घुटनों के बल सीधे खड़े हो जाएं, तथा पैरों की एड़ियां उठी हुई हो और दोनों पैरों के बीच की दूरी कम से कम आधा फिट होनी चाहिए। उसके बाद दोनों हाथों को अपने कमर पर रख ले। अब आप अपने हाथों को ऊपर की ओर उठाते हुए पीछे एड़ी की तरफ ले जाए। उष्ट्रासन की अवस्था में अपने सिर को आसमान की तड़प उठा कर रखें।

ustrasana

उष्ट्रासन से हमारी रीढ़ की हड्डी में होने वाले दर्द में छुटकारा मिलता है। इसके अतिरिक्त पेट की चर्बी डायबिटीज व आंखों की कम रोशनी जैसी समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है।

भुजंगासन

भुजंगासन करने के लिए सबसे पहले आप किसी किसी फर्श या चटाई पर पेट के बल लेट जाए, उसके बाद आप अपने हाथों को कंधे के बराबर नीचे तथा थोड़ा बाहर रखेंगे। ध्यान रहे जैसा कि चित्र में दिखाया गया है, उसी तरह से आप पैरों के पंजो को नीचे की ओर रखेंगे। अब आपको अपनी नाभि से छाती को ऊपर उठाना है, कोहनियों को अंदर की ओर लाइए तथा ऊपर की ओर देखते वह धीरे-धीरे सांस लीजिए। अब आपको सांस छोड़ते हुए पिछली अवस्था में दोबारा आना है।

यह प्रक्रिया द्वारा करने से पहले अपने पांव को पूरा relax कीजिए और अपने हाथों को सिर के सामने सीधा करिए और तेजी से 3 बार सांस लीजिए और छोड़िए।

सलभासन

सलभासन अवस्था में सबसे पहले पेट के बल लेट जाएंगे, इसके बाद पैरों को तथा घुटनों को आपस में मिलाएंगे फिर हथेलियों को जांघों के नीचे ले जाएंगे। अब ठुड्ढी या गाल को फर्श या जमीन पर पर तिकाएँगे। इसके बाद आप दोनों पैरों को जमीन से सांस भरते हुए ऊपर की ओर उठाएंगे। इस अवस्था में जांघो से लेकर पैर के पंजों तक उठाने में नीचे से हथेलियों की मदद ले सकते हैं। इसके बाद सामान्य अवस्था में आने के लिए अपनी साँस को धीरे धीरे छोड़ते हुए तथा हथेलियों के सहारे से धीरे-धीरे नीचे की ओर आए।

आप इस आसन में जितनी देर पैर हवा में रोक सकते हैं उतने समय तक सांसों की गति सामान्य रहेगी। ध्यान रहे कि इस आसन को 1 दिन में दो से तीन बार किया जा सकता है। सलभासन को एक बार मे 50 sec तक किया जा सकता है।

मर्कटासन

मर्कटासन की मुख्यता तीन विधियां हैं जोकि कुछ इस प्रकार निम्नलिखित है-

विधि1. सबसे पहले आसन में पीठ के बल लेट जाएंगे, फिर अपने हाथों को एक दूसरे के विपरीत रखेंगे जैसा कि निचे चित्र में दिखाया गया है। हथेलियों को ऊपर की ओर या फिर नीचे की ओर रख सकते हैं।

विधि2. अब हम दोनों घुटनों को मोड़ लेंगे उसके बाद एड़ियां तथा घुटने आपस में मिला लें, 

विधि3. अब सांस भरेंगे तथा सांस छोड़ते हुए दोनों घुटनों को दाएं और ले जाएं और सर को बाई और ले जाएंगे इस अवस्था में जितनी देर आप रुकते हैं, उतनी देर तक सांसों की गति सामान्य बनाए रखें। अब आपको सांस भरते हुए सीधे आना है तथा सांस छोड़ते हुए फिर से बाई और घुटनों को ले जाएंगे तथा दाएं और सिर को लाना है। ध्यान रहे कि यह आसन करते समय घुटने के ऊपर घुटना तथा एड़ी के ऊपर एड़ी होनी चाहिए।

मर्कटासन को दोनों तरफ 5 से 6 बार किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त मर्कटासन एक तरफ करने का समय कम से कम 15 सेकंड तथा अधिकतम 60 सेकंड तक किया जा सकता है।

पवनमुक्तासन

स्टेप1. इस आसन को करने की सबसे पहले विधि है कि जमीन पर पीठ के बल लेट जाइए। अब आपको दोनों पैरों तथा कोहनियों को बिल्कुल सीधा करना है। इसके बाद आपको अपने दाएं घुटने को मोड़ना है तथा दोनों हाथों की उंगलियों को आपस में फंसा कर दाएं घुटने को छाती की तरफ ले जाएंगे। घुटने को छाती की तरफ ले जाने के बाद सांस को अंदर भरेंगे फिर नाक को घुटने से छुएंगे।

इस अवस्था में जितनी भी देर रुकेंगे सांसो की गति सामान्य रहेगी तथा बायां घुटना बिल्कुल सीधा रहेगा।

पुनः अवस्था में आने के लिए सांस छोड़ते हुए पहले सिर को जमीन पर लाएंगे फिर घुटने को सीधा कर लेंगे।

अब आप को फिर से बाएं घुटने को मुड़ना है तथा दोनों हाथों की उंगलियों को फंसा कर उनकी सहायता से घुटने को छाती की तरफ लाना है, फिर सांस भरकर सिर को उठाते हुए नाक को घुटने से छूना है। उसके बाद सांस छोड़ते हुए पुनः सिर को जमीन पर लाएंगे तथा बाएं घुटने को सीधा कर लेंगे।

स्टेप 2. इसके बाद आपको दोनों घुटनों को एक साथ मोड़ेंगे और फिर दोनों हाथों की उंगलियों को आपस में फंसा कर उनकी सहायता से घुटनों को छाती की तरफ लाएंगे तथा सांस भरते हुए सर की नाक को दोनों घुटनों के बीच लाएंगे। इस स्टेप में सांसो की गति सामान्य रहेगी तथा हाथों से घुटनों को छाती की तरफ दबाए रखेंगे। फिर से सांस छोड़ते हुए सिर को नीचे चलाएंगे तथा अब हाथों को छोड़ते हुए जमीन पर और लाएंगे घुटनों को सीधा करेंगे।

पवनमुक्तासन को शुरुआती 4 से 5 दिनों तक एक-एक पैरों से करेंगे। 4 से 5 दिनों बाद आप इस आसन को दोनों पैरों से कर सकते हैं। सामान्यता 1 दिन में पवनमुक्तासन को दो से तीन बार करें। इस आसन का अभ्यास एक बार में कम से कम 12 सेकंड तथा अधिकतम 60 सेकंड तक किया जा सकता है। परंतु शारीरिक सामर्थ्य के अनुसार इसकी समय सीमा व अभ्यास को बढ़ाया तथा घटाया भी जा सकता है।

पवनमुक्तासन के लाभ

उपर्युक्त बताए गए सभी आसनों को प्रतिदिन करने से सर्वाइकल pain तथा वर्टिगो से पीड़ित व्यक्तियों के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकता है। इसलिए आपको नियमित एक्सरसाइज के साथ योगासन अनुलोम विलोम, प्राणायाम करना चाहिए ताकि हम स्वस्थ बनी रहे।

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