ब्रम्हचर्य आसन कैसे करें तथा उसका पालन कैसे करें? (How to do Brahmacharya Asana and how to follow it?

ब्रम्हचर्य आसन कैसे करें तथा उसका पालन कैसे करें? (How to do Brahmacharya Asana and how to follow it?

ब्रह्मचर्य आसन कैसे करें? (brahmachary aasan kaise karen) तथा (brahmachary aasan karne ke labh) ब्रह्मचर्य आसन करने के लाभ  यह जानने से पहले योग के बारे में कुछ प्राचीनतम तथ्यों को जान लेते हैं।

योगासन का इतिहास

योग परंपरा हमारी प्राचीनतम सभ्यता से चली आ रही है। योग के बारे में ऐसा कहा जाता है कि इसकी प्राचीनतम धर्म तथा संस्थाओं के जन्म से पहले योग का जन्म हो चुका था। यानी हम यह कह सकते हैं, कि विभिन्न धर्म बनने से पहले योग का महत्व पहले से ही विद्यमान था वैदिक काल में योग का अभ्यास ऋषि, मुनि किया करते थे। उसके बाद में बुद्ध और महावीर जी ने इसका पुनर विस्तार किया।

उसके बाद योग का महत्व सिंधु घाटी सभ्यता में भी दिखा है। जहां पर खुदाई करने के बाद में योग अवस्था में कुछ शारीरिक मुद्राएं मिली है, जो कि प्रत्यक्ष प्रमाण है, की प्राचीन काल में भी योग का अभ्यास किया जाता था। प्रत्यक्ष प्रमाण वेदों और शास्त्रों में भी उल्लेख है।

ब्रह्मचर्य आसन कैसे करें? (brahmachary aasan kaise karen)

प्राचीन काल के महा ऋषि, मुनि तथा हमारे महापुरुष ब्रह्मचारी का पालन करने के लिए एक आसन किया करते थे जिस आसन को किया करते थे उसका नाम ब्रह्मचर्य आसन पड़ा।

ज्यादातर लोग ब्रह्म चारी जीवन व्यतीत करने के लिए ब्रह्मचर्य आसन करते हैं।

ब्रम्हचर्य आसन का अभ्यास कैसे करें? (How to practice Brahmacharya Asana?)

ब्रम्हचर्य आसन का अभ्यास करने के लिए सबसे पहले आपको ब्रज आसन की मुद्रा में आ जाना है।

स्टेप 1– हाथों की सहायता से दोनों पैरों को मोड़ते हुए ब्रज आसन अवस्था में आ जाना है। उसके बाद अपनी कमर को बिल्कुल सीधा करें, तथा अपने मन को शांत करें।

स्टेप 2– उसके बाद हाथों की मदद से अपने पैरों को धीरे धीरे बाहर की और खोलें। ध्यान रहे कि पैर खोलने के बाद दोनों पैर आमने-सामने विपरीत दिशा में हो।

स्टेप 3– अब गर्दन और कमर को बिल्कुल सीधा रखें तथा घुटनों को आपस में मिला लें।

स्टेप 4– उसके बाद आप पुनः ब्रज आसन की अवस्था में आएंगे ध्यान रहे कि आपको अपने मन को बिल्कुल शांत रखना है, और कोई किसी प्रकार का तनाव आने से बचना है।

ब्रह्मचर्य आसन कितनी देर करें? (How long to do brahmacharya asana?)

ब्रह्मचर्य आसन का समय काल beginners के लिए 30 से 40 सेकेण्ड तक करना चाहिये। तथा जो लोग काफी समय से इस आसन को कर रहे हैं उनको 4 से 5 मिनट तक इस आसन को करना चाहिए।

ब्रह्मचर्य आसन करते समय कुछ सावधानियां

ब्रह्मचर्य आसन उन व्यक्तियों को करने से बचना चाहिए, जिनको घुटनों में दर्द जैसी समस्या या घुटनों का ऑपरेशन हुआ हो।

ब्रह्मचर्य उन लोगों को नहीं करना चाहिए जिनके पैरों में सूजन हो तथा इसके अतिरिक्त यह आसन करते समय जबरदस्ती नहीं करनी चाहिए। नहीं तो इंजरी का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा इस आसन का समय धीरे-धीरे बढ़ाना चाहिए।

ब्रह्मचर्य आसन से लाभ (Benefits of Brahmacharya Asana)

  • ब्रह्मचर्य आसन से हमारे वीर्य की रक्षा होती है जी हां जिन लोगों को स्वप्नदोष जैसी समस्या होती है, उनके लिए ब्रह्मचर्य आसन रामबाण की तरीके से काम करता है। 
  • इसके अतिरिक्त ब्रह्मचर्य आसन विचलित मन को शांत करने में सहायता देता है।
  • इसके अतिरिक्त जिन बच्चों का पढ़ाई में मन नहीं लगता उनके लिए यह बहुत फायदेमंद है। 
  • यदि ब्रह्मचर्य आसन को मंदबुद्धि वाले व्यक्ति करते हैं, तो उनका मानसिक विकास होता है।
  • ब्रह्मचार्य आसन हमारे पैरों को मजबूत करता है तथा ब्रह्मचर्य आसन हमारे पाचन तंत्र को भी मजबूत करने में सहायता प्रदान करता है।

 

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