bubonic plague: कोरोना वाइरस के बाद चीन पर ब्लैक डेथ ब्यूबोनिक प्लेग का काला साया

आज  पूरा विश्व कोरोना वायरस पैंडेमिक से लड़ रहा है इसी  दौरान चीन में ही पुराने शत्रु ने अपना सिर उठा दिया है यह थोड़ा फ़िल्मी या dramatic लग सकता है, पहले कोरोना  वाइरस COVID 19, हन्ता वाइरस, G4  वायरस  पिग फ्लू,  और अब ब्यूबोनिक प्लेग (bubonic plague) 

 

 

यह ब्यूबोनिक प्लेग  (bubonic plague)  चीन के इनर  मंगोलिया छेत्र  के बायनूर  शहर  में एक चरवाहा से इस बीमारी का पता 5 जुलाई २०२० को चला उसे स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया, उसकी स्थिति अब स्थिर है हालाँकि मंगोलिया में ही दो भाइयों ने मरमत का मास खाया जिसके कारण वह ब्यूबोनिक प्लेग (bubonic plague) संक्रमित पाया गए, जिसको लेकर वहां  रेड अलर्ट जारी किया गया।

 

 

 

कैसे फैलता है ब्यूबोनिक प्लेग 

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हालाँकि,  World Health Organization  विश्व स्वस्थ संगठन ने इसके फैलाव (outbreak) को इतना गंभीर नहीं बताया है इसका मुख्या कारण यह है की यह बैक्टीरिया जूनोटिक है जिसका अर्थ है  मनुष्य से मनुष्य में नहीं फैलता है यह कृंतक Rodent और पिस्सू (fleas) से फैलता है यह बैक्टीरिया यर्सीनिया पेस्टिस है जो कृन्तकों में यानि कुतरने वाले जानवरों में पाया जाता है जिनकी त्वचा पर पिस्सू pleas  रहते हैं तत्पश्चात  मनुष्यों के संपर्क में आते  है और वाहक का कार्य करते है।

 

 

 

 

 पांचवी एवं पन्द्रवीं सताब्दी के मध्य में प्लेग को Black Death काली मृत्यु के रूप में जाना जाता था क्योंकि  यह यूरोप में करोड़ों लोगों की मृत्यु के लिए जिम्मेदार था यह Plague काफी खतरनाक है इसकी ठीक होने की दर लगभग 38 % बताई गयी है।

 

 

 

 

 

 ब्यूबोनिक प्लेग के लक्षण  (Bubonic plague Symptoms)

 

  1. सूजी हुई लसिका ग्रंथियां
  2.  आकस्मिक घाव ( अवसाद )
  3. अधिक ठंड लगना तेज बुखार
  4.  मासपेशियों का टूटना
  5.  दौरे पड़ना करणा रक्तश्राव
  6.  उल्टी  और खासी
  7.  शरीर पर काले  चक्कते
  8.  त्वचा पर घाव
  9.  साँस लेने में तकलीफ
  10.  सूजी हुई गिल्टियाँ 
  11. अंगूठा अंगुली होंठ नाक पर घाव 
 

   प्लेग के प्रकार  (Kinds of plague) 

 

1. ब्यूबोनिक प्लेग ( Bubonic plague)

 

यह व्यक्ति की लसिका ग्रन्थि को प्रभावित करता है जो व्यक्ति के इम्युनिटी  सिस्टम का भाग है ,इससे लसिका ग्रंथियों  में सूजन हो जाती है यदि समय पर इलाज न किया जाये तो निमोनिक  प्लेग एवं सेप्टिसेमिक प्लेग  में परिवर्तित हो सकता है इसके लक्षण बुखार, ठण्ड लगना, कमजोरी ,व सर दर्द।

 

2. निमोनिक प्लेग ( Pneumonic plague)

 

विश्व स्वस्थ संगठन के अनुसार निमोनिक प्लेग बड़े स्तर  पर फैलने वाला प्लेग  है इससे व्यक्ति की 24 से 72 घंटे में मौत हो जाती है इसके फैलने की स्थिति तब होती है जब बैक्टीरिया फेफड़ों को संक्रमित कर देता है और यह प्लेग का ऐसा प्रकार है जो व्यक्ति से व्यक्ति में फ़ैल सकता है  लक्षण, बुखार, सीने  में दर्द, खांसी।

 

 

 

3. सेप्टिसेमिक प्लेग (Septicemic plague) 

 
यह  तब फैलता है जब बैक्टीरिया रक्त में प्रवेश कर जाता है 

 

प्लेग का इलाज एवं नियंत्रण (Plague treatment and control)

 

1. यह शुरुआती दौर में एंटीबायोटिक दवाओं से ठीक किया जा सकता है एक समय तक केवल एंटीबायोटिक  लेना फायदेमंद नहीं रहता, व्यक्ति को ठीक करने के लिए नसों में तरल पदार्थ और अतिरिक्त ऑक्सीजन की आवस्यकता होती है हालाँकि इसकी फैलने की दर अधिक हो सकती है इसलिए व्यक्ति को (आइसोलेशन या कुरेन्टीन  )अकेले रखना चाहिए।

 

 

2. इसको फैलने से रोकने के लिए संपर्क में आए दूसरे व्यक्तियों को भी एंटीबायोटिक की खुराक देनी चाहिए अन्य उपायों में प्लेग के फैलाव को रोकने के लिए कृंतकों (rodents) की जनसँख्या पर नियंत्रण की आवश्यकता है जिसके लिए अपने घरों के आस-पास पेस्ट नियंत्रण रसायन का छिड़काव करना चाहिए जिससे आस -पास क्षेत्र के साफ़ रहे,  और पेड़ों की झाड़ियों में रहने वाले एवं उनपर फीड करने वाले पिस्सु पनपने न पाएं।

 3. जानवरों का कच्चा मास खाने से बचें ।

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