सूर्य नमस्कार कैसे करें? चरण दर चरण और उनके अतुल्य लाभ How to do Surya Namaskar?

क्या इस संसार में सूर्य के बिना जीवन चल सकता है तो उत्तर होगा नहीं कभी नहीं, इस धरती पर जितने भी जिव है सभी के लिए सूर्य की उपस्थिति आवश्यक है, इसीलिए सूर्य नमस्कार सूर्य के लिए सम्मान प्रकट करने की एक पुरानी विधि है जो की पृथ्वी पर जीवन के सभी स्रोतों का रूप है। 

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 सूर्य नमस्कार क्यों किया जाता है? Why is do surya namaskar in Hindi

सूर्य नमस्कार के लगातार अभ्यास के द्वारा जो मणिपूर्ण चक्र होता है उसका अभ्यास होता है इससे व्यक्ति की रचनात्मक और अन्तर्ज्ञान बढ़ता है  उसकी सोचने सझने की शक्ति  बढ़ती है यही कारण था की प्राचीनकाल में ऋषियों ने सूर्य नमस्कार पर इतना बल दिया गया। 

सूर्य संस्कार एक ऐसा योग है जिसको करने के बाद और कोई  की जरुरत नहीं पड़ती जो आपको शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रखता है। 

सूर्य नमस्कार 12 शक्तिशाली योग आसनो का एक समन्वय है, जो उत्तम कार्डिओ वायस्कूलर व्यायाम भी है और स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है। सूर्य नमस्कार मन एवं स्वस्थ दोनों को स्वस्थ रखता है। जो लोग प्रतिदिन सूर्य नमस्कार करते हैं,उनकी आयु प्रज्ञा, बल, वीर्य और तेज बढ़ता है। 

अच्छे स्वास्थ्य के अलावा, सूर्य नमस्कार इस ग्रह पर जीवन को बनाए रखने के लिए सूर्य का आभार व्यक्त करने का अवसर भी प्रदान करता है।

 

वजन घटाने वाले योगासन

अच्छे स्वास्थ्य के लिए यह पांच आसन जरूर करें

 

सूर्य नमस्कार कब  करना चाहिए? when to do surya namaskar in hindi 

अगर सूर्य नमस्कार को दोपहर में किया जाये तो यह  है, और अगर इसको साम को  किया जाए तो तनाव को कम करने में मदत करता है। 

 

सूर्य नमस्कार कितनी बार करना चाहिए?  how many times to do surya namaskar in hindi 

सूर्य नमस्कार एक बार में 4 -5 बार कर सकते है धीरे-धीरे समय अनुसार 10 से 15 बार तक करें 

 

सूर्य नमस्कार चरण दर चरण Surya Naskar in Hindi

चरण 1 प्राणायाम Pranayam in Hindi

सूरज की तरफ चेहरा करके सीधे खड़े हो जाएँ और अपने दोनों पैरों को मिलाएं,कमर को सीधी रेखा में रखें, और हाथों को सीने  के पास लाएं और दोनों हथेलियों को मिलाकर प्रणाम  की अवस्था  करें, आज्ञा चक्र पर केंद्रित करें। 

 

चरण 2 हस्तोसत्ताहनासन  Hastottanasana in Hindi

अपनी स्वांस को धीरे-धीरे लेते हुए अपने दोनों हाथों को मिलाकर ऊपर से पीछे की ओर तानने की कोसिस करें  भुजाओं और अपनी गर्दन को पीछे की ओर झुकाएं अपने ध्यान को अपनी गर्दन के पीछे विशुद्धि चक्र पर लगाएं। 

 

चरण 3. हस्तपादासन Hastapadasana in Hindi

तृतीय स्थिति में अपनी प्राण वायु को धीरे-धीरे बहार की ओर निकालते हुए अपनी कमर से आगे की ओर झुकें  हाथों को गर्दन के साथ निचे झुककर अपने दोनों पैरों को छूने की कोशिस करें,  सीधे रखें अब आपका ध्यान नाभि के पीछे पाणिपुरक चक्र पर होना चाहिए थोड़ी देर इसी स्थिति में बने रहें। 

 

चरण 4. अश्व संचलाना Ashwa Sanchalanasana in Hindi

इसी अवस्था में अपनी प्राणवायु  हुए अपने बाएं पैर को पीछे की तरफ लें जाएँ,  आपकी छाती आगे की ओर तनी हुई, अपनी टांग को सीधी पीछे की ओर खीचें और अपने पैर का पंजा खड़ा रखें, इस अवस्था में कुछ देर रुकें, अपने ध्यान को विशुद्धि चक्र पर केंद्रित करें। 

 

चरण 5. दंडासन Dandasana in Hindi

स्वांस को धीरे-धीरे बहार की ओर करते हुए दाएं  पैर को भी पीछे की ओर ले जाएँ।  पैरों की एड़ियां परस्पर मिली हुई हों, पीछे की ओर शरीर को खिचाव दें और एड़ियों को जमीन पर मिलाने का प्रयास करें। नितम्बों को अधिक से अधिक ऊपर उठायें। गर्दन को निचे  झुकाकर  ठोडी को कण्ठकूप में लगाएं। ध्यान सहस्त्रार चक्र पर रखें। 
 

 

 

चरण 6. अष्टांग नमस्कार Ashtangasana Namskar in Hindi

स्वांस को भरते हुए शरीर को जमीन के  समान्तर, सीधा सस्टांग दण्डवत करें और पहले घुटने, छाती और माथा जमीन  पर लगा दें। नितम्बों को थोड़ा ऊपर उठा दें। स्वांस छोड़ दें। ध्यान को आहत चक्र पर टिका दें।  स्वांस की गति सामान्य करें। 

 

चरण 7. भुजंगासन Bhujangasana in Hindi

 

इस स्थिति में धीरे-धीरे स्वांस को भरते हुए छाती को आगे की ओर खींचते हुए हाथों को सीधे कर दें। गर्दन को पीछे की ओर ले जाएँ। घुटने जमीन को छूते हुए तथा पैरों के पंजे खड़े रहें। मूलाधार को खींचकर वहीँ ध्यान को टिका दें। 

 

 
 

                               

चरण 8. अधो मुख संवासन Adhomukhasana in Hindi

इसे पर्वत आसान भी कहा जाता है। अपनी स्वांस को धीरे-धीरे बहार की तरफ निकलते हुए दाएं पैर को भी पीछे लें जाएँ। दोनों पैरों की एड़ियां परस्पर मिली हुई हों। पीछे की ओर शरीर को खिचाव दें और अपनी एड़ियों को जमीन पर मिलाने का प्रयास करें। नितम्बों को अधिक से अधिक उठायें। गर्दन को निचे झुकाकर ठोडी को कंठकूप  लगाएं।  ध्यान सहस्रार चक्र पर केंद्रित करें। 

 

 

 

चरण 9. अश्व संचलाना Ashwa Sanchalanasana in Hindi

इसी स्थिति में  श्वांस  को भरते हुए बाएं पैर  को पीछे की ओर लें जाएं।  छाती को खींचकर आगे की ओर ताने।  गर्दन को पीछे की ओर झुकाएं टांग तनी हुई सीधी पीछे की ओर खींचे और पैर का पंजा खड़ा हुआ। इस स्थिति में कुछ समय रुकें। ध्यान को स्वाधिष्ठान व विसुद्धि चक्र पर लें जाएँ। मुखाकृति  सामान्य रखें। 

 

 

चरण 10. हस्तपादासन Hastapadasana in Hindi

तीसरी स्थिति में  स्वांस को धीरे-धीरे  बहार की ओर निकालते हुए गर्दन के साथ,कानो  सटे हुए निचे जाकर पैरों के दाएं-बाएं जमीन को छुएं।  घुटने  सीधे रखें। माथा घुटनो का स्पर्श  हुआ ध्यान नाभि के पीछे मणिपूरक चक्र पर केंद्रित करते हुए कुछ देर इसी स्थिति में रुकें। कमर और रीढ़ के दोष वाले साधक  न करें। 

 

चरण 11.  हस्तोसत्ताहनासन  Hastottanasana in Hindi

 

इस आसन को अर्धचंद्रासन भी कहा जाता है अपनी स्वांस को भरते हुए दोनों हाथों को कानो से सटाते हुए ऊपर की ओर ताने तथा अपनी भुजाओं और गर्दन को पीछे की ओर झुकाएं। ध्यान को गर्दन  के पीछे विशुद्धि चक्र पर केंद्रित करें। 

 

 

 

चरण 12. प्राणायाम  Pranayamasna in Hindi

यह स्थिति पहली स्थिति की भांति रहेगी।  सूरज की तरफ  सीधे  खड़े हो जाएँ और दोनों पैरों  को मिलाएं,कमर सीधी रखें। अब हाथों को सीने के पास लाएं और दोनों हथेलियों को मिलाकर प्राणायाम की अवस्था बनाएं। 

 

 

यह सूर्य नमस्कार का एक सेट पूरा हुआ। 

सूर्य नमस्कार को गति के साथ किया जाये तो यह वजन घटाने weight loss  में काफी मदत कर सकता है लेकिन कोसिस करें किसी योग शिक्षक की देख रेख में ही करें। 

 

सूर्य नमस्कार कितनी बार करना चाहिए?  how many times to do surya namaskar in hindi 

सूर्य नमस्कार एक बार में 4 -5 बार कर सकते है धीरे-धीरे समय अनुसार 10 से 15 बार तक करें

सूर्य नमस्कार के लाभ  Benefit Surya Namaskar in Hindi

हृदय स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद करता है। 

तंत्रिका तंत्र को उत्तेजित करता है। 

मांसपेशियों को खींचने, फ्लेक्स करने और टोनिंग में मदद करता है। 

वजन घटाने के प्रबंधन के लिए एक उत्कृष्ट व्यायाम। 

स्वसन तंत्र  को मजबूत  करता है। 

संज्ञानात्मक कार्यों को बढ़ाता है। 

समग्र स्वास्थ्य में सुधार करता है, शरीर को मजबूत करता है और मन को शांत करता है।  

सूर्य नमस्कार की सावधानियां 

जिन लोगों को कमर दर्द है उनको इस आसन को करने से बचना चाहिए।  
जिन लोगों को स्लिप डिस्क की दिक्कत है उन लोगों को सूर्य नमस्कार बिलकुल नहीं करना चाहिए। 
साइटिका की परेशानी से जूझ रहे है उन लोगों को इस आसन को करने से बचना चाहिए। 
मासिक धर्म के दौरान महिलाओं को सूर्य नमस्कार बिलकुल नहीं करना चाहिए। 
अगर व्यक्ति का ऑपरेशन हुआ है उनको डॉक्टर की सलाह पर ही सूर्य नमस्कार करें। 
लोगों को हर्नियां की परेशानी है वह लोग भी इसे करने  से बचें। 

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